तुमको सोचा तो ये ख्याल आया.......
तुमको देखा तो ये ख्याल आया
तुम्हें क्यूँ ना पाया ये ख्याल आया.....
तुम्हें ना पाने का फिर मलाल आया
कुदरत ने जो नायाब बनाया उसपे नाज़ आया....
उस नायाब को पाने का फिर ख्वाब आया
तुमको सोचा तो ये ख्याल आया....
मन में सोचा तो ये सवाल आया
क्यूँ कुछ ख्वाब, ख्वाब ही रह जाते....
रेत के घरोंदे की तरह ढह जाते
क्यूँ कुछ सपने बस सपने ही रह जाते....
आँखें खुलते ही हकीक़त की याद दिलाते
रेत के घरोंदे की तरह ढह जाते
क्यूँ कुछ सपने बस सपने ही रह जाते....
आँखें खुलते ही हकीक़त की याद दिलाते
तुमको सोचा तो ये ख्याल आया....
कि बातें कुछ तुम्हारी बस दिल में घर कर जाती...
रह-रह के तुम्हारी याद दिला जाती
यादें तुम्हारी पल-पल मुझे सताती....
इक पल मिलने को उकसाती
पर फिर मन में वही ख्याल आता है...
तुम्हें ना पाने का मलाल आता है
लेकिन दिल में इक आस अभी भी है...
तुमसे मिलने कि प्यास अभी भी है
ख्वाब कैसे भी हों...
उनको पाने कि चाह अभी भी है
सपने कैसे भी हों...
उनके हकीकत में बदलने कि आस अभी भी है
तुमको सोचा तो ये ख्याल आया.......
तुमको देखा तो ये ख्याल आया
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*dedicated to someone special

